पा फिल्म के अमिताभ जैसा बच्चा इलाहबाद मैं !! सरकार से मदद की उम्मीद !!

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इलाहाबाद – आपने ‘पा’ फिल्म तो देखी ही होगी जिसमें अमिताभ बच्चन एक ऐसे बच्चे का रोल अदा करते हैं जो एक खास तरह की बीमारी से ग्रस्त है। करोड़ लोगों में कभी किसी एक को होने वाली यह बीमारी इलाहाबाद के एक शख्स को है। जिसके चलते वह हूबहू पा फिल्म के अमिताभ बच्चन की तरह ही दिखता है। यह बच्चा उम्रदराज होने के बावजूद बच्चा ही दिखता है जबकि इसका शरीर बूढ़ा होता जा रहा है।

अमिताभ बच्चन ने पर्दे पर जब प्रोजेरिया नाम की बीमारी को जिया था तो लोगों ने इस बीमारी से ग्रसित मरीजों की पीड़ा देखी थी। करीब 80 लाख बच्चों में किसी एक को ही यह बीमारी होती है। आज हम आपको ऐसे ही शख्स से मिलवा रहे हैं जो इसी बीमारी से ग्रस्त है। अमिताभ बच्चन ने इसी तरह के बच्चे की जिंदगी को फिल्म में जिया था। इलाहाबाद के हनुमानगंज में धनैचा गांव पड़ता है। यहीं के एक गरीब किसान रमापति का परिवार रहता है। इसी परिवार में जन्म लेने वाला रुपेश प्रोजेरिया बीमारी से ग्रसित है जिससे पर्दे पर दिखाई जिंदगी यहां सच होती दिख रही है। रूपेश खुद शौच तक नहीं कर पाता। हर वक्त उसकी देखरेख में कोई न कोई लगा रहता है।

रूपेश इक्कीस साल का हो गया है। लेकिन उसकी लंबाई चौड़ाई और दिमाग सबकुछ बच्चे की तरह है। लेकिन वह दिखने में बिल्कुल बूढ़ा नजर आता है। जब रूपेश का जन्म हुआ था तो वह नॉर्मल बच्चों की ही तरह था। लेकिन 2 साल पूरा होते-होते शरीर में असामान्य बदलाव होने लगा। रूपेश का सिर सामान्य से बड़ा होता गया और पूरा शरीर सूखता गया। वह शरीर में दर्द की शिकायत करता। मां-बाप डॉक्टर के पास ले जाते। लेकिन बीमारी का कुछ पता नहीं चल सका।

लगभग तीन साल पहले इलाहाबाद में सर्कस लगा हुआ था। उसी समय सर्कस के मैनेजमेंट के लोग रूपेश के घर पहुंचे। मां-बाप से रूपेश को बेचने के लिये कहा गया और बदले में तीन लाख की पेशकश की गई। गरीब परिवार के लिये यह बड़ी रकम थी। लेकिन मां तैयार नहीं हुई और बेटे को बेचने से मना कर दिया। बचपन से ही दर्द की शिकायत करते-करते अब रूपेश ने दर्द से ही समझौता कर लिया है। वह कितने दिन जियेगा। किसी को नहीं पता । पर मां-बाप उसके लिये जो कुछ भी कर सकते हैं, करते हैं।

रूपेश के मां बाप शांति व रमापति बताते हैं कि बेटे के इलाज में मदद के लिये उन्होंने केशव प्रसाद मौर्य, विधायक सईद अहमद और यहां तक की पीएम मोदी को भी पत्र लिखा लेकिन कोई मदद नहीं मिल सकी। हालांकि आशुतोष मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से रुपेश की मदद की जा रही है।

इस बीमारी को Hutchison Gilford Progeria Syndrome (हैचिंगसन गिलफोर्ड प्रोजेरिया सिंड्रोम ) कहते हैं।विश्व में कुछ गिनती के लोगों को ही यह बीमारी है। यह बीमारी होने पर 13 से 22 की उम्र तक बच्चे जिंदा रह पाते हैं। लेकिन उनके उठने-बैठने, सोने, भोजन करने में बहुत दर्द होता है। यह एक वंशानुगत बीमारी है जिसमें कम उम्र के बच्चों में ही बुढ़ापे के लक्षण दिखने लगते हैं लेकिन इसके कारण और इलाज की खोज अब भी जारी है। इस बीमारी से ग्रसित बच्चों के शरीर के हर अंग पर 2 साल में ही प्रभाव दिखाई देने लगता है। यहां तक कि दांत, बाल भी नहीं बचते। किसी बूढ़े व्यक्ति की तरह शरीर ढीला, चमड़ी पीली, आंखों के नीचे गड्ढे हो जाते हैं। ऐसे बच्चों को खाने में दिक्कत के अलावा सोने और उठने-बैठने में भी परेशानी होती है।

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