सोमवार, 12 जनवरी 2026

महर्षि आश्रम करौंदी में धूमधाम से मनाई गई महर्षि महेश योगी की 109वीं जन्मजयंती

करौंदी (कटनी)। महर्षि आश्रम भारत के भौगोलिक केंद्र ब्रह्मस्थान करौंदी में विश्वविख्यात योग गुरु की 109वीं जन्मजयंती “ज्ञान युग दिवस समारोह” के रूप में अत्यंत श्रद्धा, गरिमा और उत्साह के साथ मनाई गई।

कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक गुरु पूजन, दीप प्रज्वलन एवं वैदिक पंडितों द्वारा शांति पाठ के साथ हुई। अतिथियों का पारंपरिक विधि-विधान से स्वागत किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए आश्रम प्रभारी अरविंद सिंह ने कहा कि आज का दिन महर्षि जी के वेद ज्ञान, ध्यान, शिक्षा और संस्कृति को स्मरण करने तथा उसे अपने जीवन में आत्मसात करने का अवसर है। उन्होंने महर्षि के जीवन परिचय और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महर्षि जी को किसी औपचारिक डिग्री की आवश्यकता नहीं थी—उनका व्यापक ज्ञान और विश्वव्यापी प्रभाव इसका प्रमाण है।
महर्षि जी का मानना था कि सारा ज्ञान हमारी चेतना में निहित है और उसी चेतना के माध्यम से ज्ञान की प्राप्ति होती है—जिसे अनेक शोधों ने प्रमाणित किया है।

अरविंद सिंह ने भावातीत ध्यान (ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन) के महत्व पर बल देते हुए कहा कि इसके नियमित अभ्यास से व्यक्ति तनाव, मानसिक परेशानियों और असंतुलन से मुक्ति पा सकता है।

अतिथियों के प्रेरक उद्बोधन के पश्चात धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि पद्मेश गौतम, भाजपा मंडल अध्यक्ष आशीष चौरसिया, समाजसेवी राजेश व्यौहार, गोविंद प्रताप सिंह, विजय दुबे, जनपद अध्यक्ष संतोष दुबे, खेल समिति अध्यक्ष आशीष जी, महर्षि वैदिक विश्वविद्यालय के प्राध्यापक मानवेंद्र पांडे, आश्रम प्रभारी रतीभान सिंह, व्यवस्था प्रभारी बलराम भारद्वाज, रामदरस यादव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय गणमान्य नागरिक, मीडिया प्रतिनिधि, आश्रम के आचार्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

संदेश: ज्ञान, ध्यान और चेतना—यही है महर्षि का मार्ग, यही है ज्ञान युग का संदेश।

शनिवार, 10 जनवरी 2026

देर रात बंगला लाइन में जुआ अड्डे पर पुलिस का छापा, 5 जुआरी गिरफ्तार

कटनी।
थाना माधवनगर पुलिस ने देर रात जुआ खेलने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच जुआरियों को रंगे हाथों पकड़ा। 

दिनांक 10 जनवरी 2026 की रात चौकी प्रभारी निवार अंजनी मिश्रा को मुखबिर से सूचना मिली कि बंगला लाइन स्थित मुकेश मनुजा के निवास पर घर के अंदर जुआ खेला जा रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद थाना प्रभारी माधवनगर निरीक्षक संजय दुबे एवं चौकी प्रभारी निवार अंजनी मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने दबिश दी। मौके पर ताश के पत्तों पर रुपये-पैसों का दांव लगाकर जुआ खेलते पांच लोग पकड़े गए।

पकड़े गए आरोपियों में मुकेश मनुजा (34) निवासी बंगला लाइन, मनीष नागवानी (35) निवासी हॉस्पिटल लाइन, संजय उर्फ लारा मोटवानी (39) निवासी बंगला लाइन, जयपाल पंजवानी (35) निवासी खैबर लाइन तथा श्याम राजानी (36) निवासी कैरिन लाइन शामिल हैं।

तलाशी के दौरान मौके से 52 ताश के पत्ते, जुआ फड़ व पास से ₹82,500 नगद बरामद किए गए। साथ ही दो मोटरसाइकिलें—MP54 MC 4118 एवं MP21 MP 1872—जप्त की गईं। कुल जप्त सामग्री की अनुमानित कीमत ₹1,82,500 बताई गई है।

पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है तथा सभी के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई है। कार्रवाई में निरीक्षक संजय दुबे, चौकी प्रभारी निवार अंजनी मिश्रा सहित पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका रही।


शहडोल सांसद की अनुशंसा और उनके प्रतिनिधि की लगन से मिला उमरियापान को खेल मैदान, कलेक्टर का जताया आभार

कटनी। सांसद हिमान्द्री सिंह की अनुशंसा और सांसद प्रतिनिधि पदमेश गौतम की सतत पहल रंग लाई। उमरियापान क्षेत्र के खेल प्रेमियों और युवाओं की वर्षों पुरानी मांग आखिरकार पूरी हो गई। ग्राम मड़ेरा में खेल मैदान निर्माण हेतु लगभग 10 एकड़ (3.74 हेक्टेयर) शासकीय भूमि आवंटित किए जाने पर खेल विकास समिति, उमरियापान ने कलेक्टर आशीष तिवारी का अभिनंदन कर आभार व्यक्त किया।

खेल विकास समिति के अध्यक्ष आशीष चौरसिया ने कहा कि यह उपलब्धि सांसद हिमाद्रि सिंह की अनुशंसा और शहडोल सांसद प्रतिनिधि पद्मेश गौतम की लगन का प्रतिफल है। कलेक्टर द्वारा त्वरित निर्णय लेकर आदेश जारी किए जाने से क्षेत्र के युवाओं के सपनों को नया आयाम मिला है।


समिति ने कहा कि खेल मैदान के निर्माण से उमरियापान और आसपास के गांवों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का सशक्त मंच प्राप्त होगा। समिति एवं स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन, सांसद और सांसद प्रतिनिधि का संयुक्त रूप से आभार जताया।

शुक्रवार, 9 जनवरी 2026

क्या एसपी सौंपेंगे जिले की सुरक्षा बजरंग दल के हाथों? पुलिस की नाकामी पर खुला हमला—‘नहीं संभल रही व्यवस्था तो हमें जिम्मेदारी दी जाए’

क्या एसपी सौंपेंगे जिले की सुरक्षा बजरंग दल के हाथों?

पुलिस की नाकामी पर खुला हमला—‘नहीं संभल रही व्यवस्था तो हमें जिम्मेदारी दी जाए’

कटनी। जिले में बेकाबू अपराध, बेलगाम चोर और बेअसर पुलिसिंग को लेकर अब सब्र का बाँध टूट चुका है। के प्रांत प्रमुख ने पुलिस प्रशासन पर सीधा, तीखा और सार्वजनिक हमला बोलते हुए कहा कि यदि पुलिस जिले की सुरक्षा व्यवस्था संभाल पाने में असमर्थ है, तो यह जिम्मेदारी बजरंग दल को सौंप दी जाए—हम सुधार कर दिखाएंगे।

प्रांत प्रमुख ने दो टूक कहा कि अपराधियों के मन से पुलिस का भय खत्म हो चुका है। मंदिर हों या रिहायशी इलाके—चोरी की वारदातें थमने का नाम नहीं ले रहीं, जबकि पुलिस सिर्फ फाइलों, बैठकों और औपचारिकताओं तक सीमित नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है

बयान में कहा गया कि शिकायतों और ज्ञापनों का कोई असर नहीं, न गिरफ्तारी, न ठोस कार्रवाई—परिणामस्वरूप चोरों के हौसले बुलंद और आम नागरिक भयभीत है। बजरंग दल ने चेताया कि यह अब सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ खुली चुनौती है।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि तत्काल सख्त कार्रवाई, नियमित गश्त और अपराधियों पर शिकंजा नहीं कसा गया, तो संगठन सड़क से लेकर थाने तक व्यापक आंदोलन करेगा और जन-सहयोग से वैकल्पिक सुरक्षा व्यवस्था खड़ी करने पर मजबूर होगा।

अब सवाल सीधा और तीखा है—
क्या जिला पुलिस अधीक्षक इस चेतावनी को गंभीरता से लेंगे, या जिले की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे ये सवाल और उग्र रूप लेंगे?
कटनी की जनता जवाब चाहती है—कार्रवाई या फिर और बड़ा आंदोलन।

कटनी पुलिस और चोरों को सद्बुद्धि देने बजरंग दल का अनोखा आंदोलन , कोतवाली थाने में गूंजा हनुमान चालीसा का पाठ, पुलिस की निष्क्रियता पर सीधा हमला

कटनी पुलिस और चोरों को सद्बुद्धि देने बजरंग दल का अनोखा आंदोलन

कोतवाली थाने में गूंजा हनुमान चालीसा का पाठ, पुलिस की निष्क्रियता पर सीधा हमला

कटनी। जिले में बेकाबू होती चोरी और आपराधिक घटनाओं से जनता में बढ़ते भय और आक्रोश के बीच बजरंग दल ने शनिवार को पुलिस व्यवस्था पर सीधा और प्रतीकात्मक प्रहार किया। कार्यकर्ताओं ने कोतवाली थाना, कटनी परिसर में बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया और स्पष्ट शब्दों में कहा—जब पुलिस सोई रहे, तब आस्था ही आख़िरी रास्ता बचती है।


बजरंग दल के पदाधिकारियों ने तीखे लहजे में आरोप लगाया कि शहर के मंदिर, रिहायशी इलाके और बाजार अब चोरों के लिए सुरक्षित ठिकाने बन चुके हैं, जबकि पुलिस केवल औपचारिकता निभाने तक सीमित है। लगातार शिकायतों, ज्ञापनों और जनआक्रोश के बावजूद चोर बेखौफ और पुलिस बेअसर नजर आ रही है, जिससे आम नागरिक खुद को असहाय महसूस कर रहा है।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन कोई दिखावा नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन को जगाने की आखिरी चेतावनी है। यदि अब भी चोरी की वारदातों पर ठोस कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो बजरंग दल सड़कों से लेकर थानों तक उग्र आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा।

इस दौरान प्रांत पदाधिकारियों सहित कार्यकर्ताओं ने अति. पुलिस अधीक्षक संतोष डेहरिया को ज्ञापन सौंपते हुए जिले में बढ़ती आपराधिक गतिविधियों पर तत्काल और प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की।

शहर में यह दृश्य चर्चा का विषय बना रहा—जहाँ आस्था ने पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल खड़े कर दिए और एक बार फिर यह संदेश दिया कि यदि कानून कमजोर पड़ा, तो जनआक्रोश और तेज होगा।

बुधवार, 7 जनवरी 2026

राहुल दुबे को बजरंग दल महाकौशल प्रांत की कमान

राहुल दुबे को बजरंग दल महाकौशल प्रांत की कमान

कटनी | State 24 News

विश्व हिंदू परिषद महाकौशल प्रांत की दो दिवसीय प्रांत बैठक हाल ही में रीवा जिले में संपन्न हुई। बैठक में संगठन के छह माह के कार्यों की गहन समीक्षा के साथ आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के अंतिम सत्र में संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।

इस क्रम में कटनी जिले के निवासी राहुल दुबे को बजरंग दल महाकौशल प्रांत का सह संयोजक नियुक्त किया गया। उनकी नियुक्ति की घोषणा होते ही पूरे प्रांत के कार्यकर्ताओं में उत्साह और नई ऊर्जा का संचार देखने को मिला।

गौरतलब है कि राहुल दुबे ने कटनी जिले के एक छोटे से ग्राम से संगठनात्मक यात्रा प्रारंभ की और खंड, प्रखंड, नगर व जिला स्तर पर विभिन्न दायित्वों का सफल निर्वहन किया। इसके बाद उन्होंने विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री के रूप में दो वर्षों तक प्रभावी कार्य करते हुए समाज के साथ संवाद और विश्वास को मजबूत किया।

राहुल दुबे के कार्य कौशल, संगठनात्मक सूझबूझ और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए प्रांतीय शीर्ष नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। जिला मंत्री रहते हुए उन्होंने नेतृत्व, शिक्षा और कौशल विकास को निरंतर बढ़ावा दिया तथा संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई।

उनकी नियुक्ति पर महाकौशल प्रांत सहित जिले के सभी कार्यकर्ताओं ने हर्ष व्यक्त किया है और विश्वास जताया है कि उनके नेतृत्व में संगठनात्मक विस्तार और समाजहित से जुड़े कार्य और अधिक सशक्त होंगे

ढीठ शराब माफिया, बेशर्म जिम्मेदार — जिले में फैलता अवैध शराब का जाल, महिलाएँ खुद अवैध शराब पकड़ कर बोरी में भरकर पहुँचीं एसपी दफ्तर

कटनी। जिले में अवैध शराब माफिया अब कारोबार नहीं, खुली गुंडागर्दी और दहशत चला रहा है। गांव-गांव ज़हर परोसा जा रहा है, विरोध करने वालों को धमकाया जा रहा है, मारपीट, झगड़े और घरेलू हिंसा रोज़मर्रा की सच्चाई बन चुकी है—लेकिन जिम्मेदारों की आंखों पर मोटी पट्टी बंधी हुई है। यह किसी से छुपा नहीं कि शराब माफिया और जिम्मेदारों का गठजोड़ ही इस काले धंधे की सबसे मजबूत ढाल बना हुआ है।

इस शर्मनाक व्यवस्था का जीता-जागता सबूत तब सामने आया, जब स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र के देवरी मवई गांव की महिलाओं का सब्र पूरी तरह टूट गया। बार-बार थाने के चक्कर, लिखित शिकायतें और गुहार लगाने के बावजूद जब कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खोखले आश्वासन मिले, तो महिलाओं ने वही किया जो सिस्टम को करना चाहिए था—अवैध शराब खुद पकड़ी, बोरी में भरी और सीधे एसपी कार्यालय जा धमकीं


महिलाओं का आरोप बेहद गंभीर है—पुलिस को सब पता है कि कौन बेच रहा है, कहां से शराब आ रही है और किसके संरक्षण में बिक रही है, फिर भी जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं। नतीजा यह है कि माफिया बेलगाम हो चुके हैं, गांवों का माहौल नर्क बन गया है और परिवार बर्बादी की कगार पर खड़े हैं। सवाल यह नहीं कि शराब बिक रही है—सवाल यह है कि किसके इशारे पर बिक रही है?

जिले के कई हिस्सों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि अवैध शराब कारोबारी ग्रामीणों से उलझते हैं, मारपीट करते हैं, खुलेआम धमकाते हैं, लेकिन कार्रवाई कहीं दिखाई नहीं देती। जो आवाज़ उठाता है, उसे चुप कराने की कोशिश होती है और जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से बचने में माहिर बने हुए हैं

हालांकि कुछ समय पूर्व ही शराब माफियाओं द्वारा स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र में ही ग्रामीणों पर गाड़ी चढ़ाकर कुचलने की कोशिश की गई थी विरोध हुआ मामला दर्ज हुआ पर शराब माफिया जमानत में बाहर इसके बावजूद भी नही थम रही शराब की अवैध बिक्री ,

महिलाओं के एसपी दफ्तर पहुंचने के बाद अफसरों ने एक बार फिर संज्ञान और सख्त कार्रवाई का रटा-रटाया भरोसा जता दिया। लेकिन अब जनता को भरोसे नहीं, ठोस नतीजे चाहिए
यह घटना पूरे सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है—जहां कानून मूकदर्शक, जिम्मेदार बेशर्म और अपराधी ढीठ बने बैठे हैं।
अब भी अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो साफ मान लिया जाएगा कि जिले में कानून नहीं, शराब माफिया का राज चलता है—और इसकी जवाबदेही तय करने से कोई नहीं बच पाएगा।

आस्था पर संगठित हमला! कटनी में मंदिर-मंदिर चोरी—पुलिस की लचर व्यवस्था बेनकाब, प्रेस विज्ञप्तियों-रिल्स में मशगूल खाकी

विहिप बजरंग दल ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम—कार्रवाई नहीं तो आंदोलन तय

कटनी | जिले में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब वे भगवान के घर तक लूट ले जा रहे हैं। बीती मध्यरात्रि कोतवाली थाना क्षेत्र में चार से अधिक मंदिरों में चोरी और चोरी के प्रयास की वारदातों ने पुलिस की लचर व्यवस्था को नंगा कर दिया है। ठंड की आड़ में चोरों ने आस्था पर हमला बोला, जबकि पुलिस की कथित कॉम्बिंग गश्त कागज़ों, प्रेस विज्ञप्तियों और सोशल मीडिया रिल्स तक सिमटी नजर आई।

घटनाक्रम के मुताबिक, सबसे पहले गणेश चौक स्थित गणेश मंदिर में चोरों ने सेंध लगाई और मंदिर के भीतर रखे कटोरा-थाली ले उड़े। इसके बाद सिविल लाइन स्थित कल्याणी दुर्गा मंदिर में गेट का कुंडा काटने की कोशिश की गई—यहां चोर नाकाम रहे, पर सुरक्षा की पोल खुल गई। इसके बाद गायत्री नगर मेन रोड स्थित राम मंदिर में ताला तोड़कर भगवान राम का मुकुट और माला चोरी कर ली गई। बताया जा रहा है कि मुकुट आर्टिफिशियल था, लेकिन उस पर चांदी का अर्क चढ़ा होने के कारण चोर उसे असली समझकर ले गए।


चोरों का दुस्साहस यहीं नहीं रुका। देर रात बाबा घाट स्थित हनुमान मंदिर—जो मुख्य सड़क से थोड़ा भीतर है—वहां चोरों को पर्याप्त समय मिला और उन्होंने हनुमान जी का चांदी का मुकुट व छत्र चोरी कर लिया, जिसकी कीमत लगभग एक पाव चांदी बताई जा रही है।

सवाल साफ है—जब वारदातें एक के बाद एक हो रही थीं, तब रात्रि गश्त आखिर कहां थी?

इन घटनाओं से शहर में भय और आक्रोश चरम पर है। लोग खुलेआम कह रहे हैं कि पुलिस ज़मीनी कार्रवाई छोड़ प्रेस नोट्स, फोटो-ऑप और रिल्स में व्यस्त है, जबकि अपराध बेलगाम हैं। इसी बीच विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन के प्रान्त प्रमुख राहुल दुबे ने पुलिस को 24 घंटे का लास्ट अल्टीमेटम देते हुए चेताया है कि यदि चोरों की तत्काल गिरफ्तारी नहीं हुई, तो जिलेभर में वृहद आंदोलन छेड़ा जाएगा।

शहर की जनता का सीधा सवाल है—

क्या कटनी में कानून-व्यवस्था प्रेस विज्ञप्तियों और वायरल रिल्स से चलेगी?

आखिर कब टूटेगा चोरों का नेटवर्क और कब सुरक्षित होंगे मंदिर?

अब गेंद पुलिस के पाले में है—या तो त्वरित, सख्त कार्रवाई, या फिर जनाक्रोश सड़कों पर।

सोमवार, 5 जनवरी 2026

इंदौर मौतों पर सवाल पड़ा भारी, दूषित पानी पर चुप्पी—सम्मान समारोह की आड़ में मीडिया के माइक को धक्का देते हुए भागीं मंत्री प्रतिमा बागरी


कटनी। इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों का मामला अब सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही की कसौटी बन चुका है। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता के X पोस्ट के बाद प्रदेश की राजनीति और गर्म हो गई है। ताज़ा घटनाक्रम कटनी से सामने आया, जहां मीडिया के तीखे सवालों से नगरीय प्रशासन मंत्री जवाब देने की बजाय मंच छोड़ती नज़र आईं।


कटनी के द्वारका भवन में आयोजित राज्य शिक्षक सम्मान समारोह में शामिल होने पहुंचीं मंत्री से जैसे ही में दूषित पानी से हुई मौतों और राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल किया गया, उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय विषय बदल दिया। सवाल इंदौर की मौतों पर था, लेकिन मंत्री शिक्षा संघ की गतिविधियों पर बयान देने लगीं। मीडिया द्वारा सवाल दोहराए जाने के बावजूद करीब एक मिनट तक वे उसी विषय पर बोलती रहीं। बयान खत्म होते ही औपचारिक धन्यवाद कहा और बिना जवाब दिए मंच व कार्यक्रम छोड़कर तेजी से निकल गईं—इस दौरान मीडिया के माइक को धक्का लगने की भी चर्चा रही।

इस घटनाक्रम पर कार्यक्रम में मौजूद कटनी सांसद ने कहा कि सरकार इंदौर मामले को लेकर गंभीर है, अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है और आगे भी सख्त कदम उठेंगे। हालांकि, जब उनसे मंत्रियों द्वारा सवालों से बचने या मंच छोड़ने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे “इंदौर तक सीमित विषय” बताकर टाल दिया।

इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अब सरकार की जवाबदेही बनाम राजनीतिक चुप्पी की बहस में बदल गया है। विपक्ष सीधे सवाल उठा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष के मंत्री सवालों से बचते नज़र आ रहे हैं। मंच छोड़कर निकल जाना क्या जवाबदेही से बचने का संकेत है? यह सवाल अब जनता पूछ रही है।

रविवार, 4 जनवरी 2026

भारत में इतिहास रचा गया: उमरियापान नगर परिषद ने परमवीरों के नाम पर रचे 15 वार्ड — देशभक्ति को मिला स्थायी ठिकाना

कटनी (मध्यप्रदेश)। स्थानीय स्वशासन की किताब में उमरियापान नगर परिषद ने ऐसा अध्याय जोड़ दिया है, जिसे आने वाली पीढ़ियाँ गौरव के साथ पढ़ेंगी। देश में पहली बार किसी नगर परिषद ने अपने सभी 15 वार्डों का नामकरण परम वीर चक्र विजेताओं के नाम पर कर दिया है। यह कोई औपचारिक निर्णय नहीं—यह राष्ट्र के सर्वोच्च बलिदान को स्थायी सम्मान देने का साहसिक और ऐतिहासिक कदम है।

यह ऐतिहासिक फैसला कलेक्टर आशीष तिवारी के मार्गदर्शन में, एसडीएम निधि गोहाल तथा जनप्रतिनिधियों के सामूहिक संकल्प से संभव हुआ। प्रेरणा स्पष्ट है—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंडमान-निकोबार के अनाम द्वीपों का नामकरण परमवीरों के नाम पर करने की राष्ट्रवादी पहल। उमरियापान ने उसी भावना को जमीनी हकीकत में उतार दिया।

अब उमरियापान के वार्ड सिर्फ प्रशासनिक सीमाएँ नहीं, बल्कि वीरता, शौर्य और बलिदान के जीवंत स्मारक हैं—जो हर नागरिक को रोज़ राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाएंगे।


स्थानीय निकाय से राष्ट्रीय संदेश

यह पहल सिर्फ नामकरण नहीं, बल्कि यह संदेश है कि वीरों का सम्मान भाषणों से नहीं, संस्थागत फैसलों से होता है। उमरियापान नगर परिषद ने दिखा दिया कि जब इच्छाशक्ति हो, तो स्थानीय शासन भी राष्ट्रगौरव की मशाल बन सकता है।

निष्कर्ष:
उमरियापान का यह निर्णय भारतीय लोकतंत्र, स्थानीय स्वशासन और सैन्य सम्मान—तीनों के लिए मील का पत्थर है। यह मॉडल देशभर की नगर परिषदों और पंचायतों के लिए प्रेरक उदाहरण बनेगा—जहाँ हर गली, हर वार्ड, हर नाम राष्ट्र के लिए धड़कता हो।

शनिवार, 3 जनवरी 2026

आंकड़ों की चकाचौंध में छुपा डर: 2025 में कार्रवाई का शोर, अपराध क्यों बेकाबू?


“प्रेस नोट मजबूत, ज़मीनी हकीकत डरावनी”

कटनी। वर्ष 2025 की विदाई पर कटनी पुलिस ने सालभर की कार्यवाहियों के आंकड़े सार्वजनिक कर यह दिखाने की कोशिश की कि जिले में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रही। ऑपरेशन शिकंजा, ड्रिंक एंड ड्राइव, कांबिंग गश्त और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत हजारों कार्रवाइयों को उपलब्धि के रूप में पेश किया गया।

लेकिन इन्हीं चमकदार आंकड़ों के पीछे छुपा सच यह है कि गंभीर अपराधों के मोर्चे पर हालात उतने मजबूत नहीं दिखते, जितना प्रेस नोट में दर्शाया गया है।

कार्रवाई का पहाड़, लेकिन अपराध का ग्राफ आसमान पर

पुलिस विभाग के आंकड़ों अनुसार—

ऑपरेशन शिकंजा – 3929

ड्रिंक एंड ड्राइव – 2105

कांबिंग गश्त – 14384

मोटर व्हीकल एक्ट – 25818

जुआ-सट्टा – 710

👉 इन आंकड़ों से साफ है कि चालान, चेकिंग और अभियान स्तर पर पुलिस बेहद सक्रिय रही,

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सक्रियता अपराध की जड़ों पर वार कर सकी, या सिर्फ संख्या बढ़ाने तक सीमित रही?

दो साल के आंकड़े, सिस्टम की पोल खोलते हुए

जब इन्हीं दावों की तुलना गंभीर अपराधों के आंकड़ों से की जाती है, तो तस्वीर चौंकाने वाली सामने आती है—

हत्या

2024: 23 हत्या → 2025: 32 हत्याएं

हत्या का प्रयास 

2024: 10 हत्या के प्रयास→ 2025: 47 हत्याओं के प्रयास

लूट

2024: 03 लूट → 2025: 05 लूट 

गृहभेदन

2024: 82 गृहभेदन → 2025: 140 गृहभेदन

👉 हत्या के प्रयास के मामलों में चार गुना उछाल इस बात का संकेत है कि अपराधियों का मनोबल कम होने के बजाय और मजबूत हुआ।

👉 गृहभेदन के 140 मामले यह सवाल छोड़ जाते हैं कि क्या आम नागरिक का घर अब भी सुरक्षित है?

आंकड़े ही सवाल बनकर खड़े हैं

जब 14 हजार से ज्यादा कांबिंग गश्त हुई, तो चोरी और गृहभेदन क्यों बढ़े?

25 हजार से ज्यादा मोटर व्हीकल एक्ट की कार्रवाई के बावजूद अपराधियों के हौसले क्यों बुलंद रहे?

क्या पुलिसिंग का ज़ोर सिर्फ चालान और दिखावटी अभियानों पर रहा, जबकि संगठित और हिंसक अपराध फिसलते रहे?

प्रेस नोट बनाम जनता की ज़मीनी हकीकत

जिले में आम चर्चा यह रही कि

काग़ज़ों में कानून-व्यवस्था मजबूत है, लेकिन सड़कों, मोहल्लों और घरों में डर की मौजूदगी बनी रही।

कानून-व्यवस्था के जानकार मानते हैं कि आंकड़ों की भरमार तब तक बेमानी है, जब तक गंभीर अपराधों पर ठोस और स्थायी अंकुश न दिखे।

2026: बदलाव की उम्मीद या आंकड़ों का नया खेल?

वर्ष 2025 का अनुभव यह साफ संकेत देता है कि

अभियानों की संख्या नहीं, उनके परिणाम ही असली पैमाना होते हैं।

जनता की अपेक्षा है कि वर्ष 2026 में पुलिसिंग—

सिर्फ प्रेस नोट और आंकड़ों की सूची न बने

बल्कि अपराधियों के मन में डर और नागरिकों के मन में भरोसा पैदा करे

क्योंकि जब आंकड़े खुद डर पैदा करने लगें, तो सवाल उठना सियासत नहीं—जनहित की ज़रूरत बन जाता है।

सत्ता का कवच या सिस्टम की मिलीभगत? ईडी–ईओडब्ल्यू की कार्रवाई के बाद भी RTO संतोष पाल व पत्नी रेखा पाल को ‘सत्ता का वीआईपी सुरक्षा कवच’ क्यों!

कटनी। भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की ज़ीरो टॉलरेंस नीति के दावे ज़मीनी हकीकत में खोखले साबित होते दिख रहे हैं। RTO संतोष पाल और उनकी पत्नी रेखा पाल के खिलाफ ने 650 गुना अनुपातहीन संपत्ति का गंभीर मामला दर्ज किया, और अब ने करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।

इसके बावजूद न तो सरकार की नींद टूटी, न ही प्रशासन हरकत में आया।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ईओडब्ल्यू और ईडी—दोनों जांच एजेंसियों की तलवार इस दंपति पर लटक रही है, तब भी परिवहन मंत्री और कटनी जिले के प्रभारी मंत्री की रहस्यमयी मेहरबानी आखिर क्यों बरकरार है? उलटे, इस भ्रष्टाचार के आरोपी दंपति को मनचाही पोस्टिंग देकर पहले कटनी और फिर महानगर जबलपुर जैसे अहम जिले की कमान सौंप दी गई।
जबकि ईओडब्ल्यू इस काले साम्राज्य पर शिकंजा कस चुका था—तो क्या यह महज़ संयोग है, या सत्ता के भीतर बैठे किसी मजबूत संरक्षण का नतीजा?

मुख्यमंत्री की चुप्पी—सवालों के घेरे में सरकार

भ्रष्टाचार पर कड़े संदेश देने वाले की सरकार से अब पूरा प्रदेश तीखे सवाल पूछ रहा है—

  • ईडी की कार्रवाई के बाद भी तत्काल निलंबन क्यों नहीं?
  • संवेदनशील पद पर बने रहने की अनुमति आखिर किसके आदेश से?
  • क्या जांच एजेंसियों की सख्ती सिर्फ कागज़ों और फाइलों तक सीमित है?

‘सुरक्षित पोस्टिंग’ की कहानी

सूत्रों की मानें तो जिस अधिकारी पर भारी अनुपातहीन संपत्ति और भ्रष्टाचार के पुख्ता आरोप हों, उसे सबसे सुरक्षित और प्रभावशाली कुर्सियों पर बैठाना सिस्टम की प्राथमिकताओं पर करारा तमाचा है। इससे साफ संदेश जाता है कि
ईमानदार अफसर हाशिये पर हैं और भ्रष्टाचार सत्ता की छाया में फल-फूल रहा है।

अंदरूनी पकड़ बेहद मजबूत

ईडी की जब्ती, ईओडब्ल्यू की एफआईआर और फिर भी कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं—ये तमाम तथ्य मिलकर एक ही संकेत देते हैं:
संतोष पाल–रेखा पाल दंपति की सरकार के भीतर पकड़ बेहद मजबूत है।
वरना जांच की आग में घिरे अधिकारी को बार-बार पुरस्कृत पोस्टिंग कैसे मिलती?

प्रदेश की जनता अब जवाब चाहती है।
क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग सिर्फ भाषणों और पोस्टरों तक सीमित रहेगी,
या सत्ता सच में कठोर और निष्पक्ष कदम उठाएगी?
आज नहीं तो कब?

बुधवार, 31 दिसंबर 2025

पति–पत्नी की काली कमाई का साम्राज्य, सफेदपोश संरक्षण का कवच

ED की कार्रवाई के बाद भी सवाल कायम—आख़िर कौन है ARTO संतोष पाल का ‘आका’?

जबलपुर/भोपाल। मध्यप्रदेश के परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार कोई छिपा हुआ राज नहीं रहा, लेकिन RTO/ARTO संतोष पाल और उनकी पत्नी, परिवहन विभाग की लिपिक रेखा पाल का मामला अब सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा बन गया है। पति–पत्नी ने मिलकर काली कमाई का ऐसा साम्राज्य खड़ा किया, जिसे वर्षों तक सफेदपोश संरक्षण का वरदान मिलता रहा।

कहानी की शुरुआत 10 हजार की मामूली नौकरी से होती है। पहले चपरासी, फिर MPPSC पास कर परिवहन विभाग में ARTO—और पत्नी उसी विभाग में लिपिक। इसके बाद शुरू हुआ फाइलों, लाइसेंस, परमिट और फिटनेस के नाम पर खुलेआम वसूली का खेल
👉 न गरीब देखा गया, न अमीर—इनकी नजर में हर व्यक्ति सिर्फ काली कमाई का ग्राहक था।


650 गुना काली कमाई की FIR के बावजूद मनचाही पोस्टिंग

सबसे बड़ा और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि EOW में पहले से ही 650 गुना आय से अधिक काली कमाई की FIR दर्ज होने के बावजूद ARTO पाल को न सिर्फ संरक्षण मिला, बल्कि परिवहन मंत्री के प्रभार वाले जिले में तैनाती भी दे दी गई।
यह तैनाती संयोग नहीं, बल्कि सीधे-सीधे राजनीतिक संरक्षण की ओर इशारा करती है।

सवाल साफ है—
👉 जब दाग सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज था, तो मंत्री प्रभार वाले जिले में पोस्टिंग कैसे मिली?
👉 आख़िर कौन है वह सफेदपोश ‘आका’, जिसने दागी अफसर को ढाल बनाकर रखा?


ED का प्रचंड प्रहार, सिस्टम की पोल

अब जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 73 लाख की वैध आय के मुकाबले 4.80 करोड़ की संपत्ति का खुलासा करते हुए 3.38 करोड़ की संपत्ति PMLA के तहत अटैच कर दी है, तो पूरा भ्रष्ट तंत्र कटघरे में खड़ा हो गया है।
जांच में सामने आया कि EMI से ठीक पहले नकद जमा कर अवैध धन को सफेद किया गया—यानी मनी लॉन्ड्रिंग का सुनियोजित खेल


मनचाही पोस्टिंग का ‘बेताज बादशाह’

सूत्रों का दावा है कि ARTO संतोष पाल मनचाही पोस्टिंग का बेताज बादशाह बन चुका था। FIR, शिकायतें और जांच—सब बेअसर रहीं। वजह साफ मानी जा रही है—
👉 ऊपर तक मजबूत पकड़ और सफेदपोशों की छत्रछाया


सिर्फ कार्रवाई नहीं, जवाब चाहिए

ED की कार्रवाई ने पति–पत्नी की काली कमाई को तो बेनकाब कर दिया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी जिंदा है
👉 आख़िर उस सफेदपोश ‘आका’ पर कार्रवाई कब होगी?
👉 क्या यह मामला भी छोटे चेहरों तक सीमित कर दिया जाएगा, या संरक्षण देने वालों की भी बारी आएगी?

जनता अब सिर्फ खबर नहीं, पूरा सच और जवाबदेही चाहती है।

RTO संतोष पाल सहित पत्नी परिवहन विभाग में ही लिपिकरेखा पाल की ‘काली कमाई’ पर ED का प्रचंड प्रहार, फिर भी कुर्सी सुरक्षित!

73 लाख की कुल आय और 4.80 करोड़ की संपत्ति—जबलपुर में 3.38 करोड़ अटैच, भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण बेनकाब

जबलपुर/भोपाल। मध्यप्रदेश के परिवहन विभाग में लंबे समय से पनप रहे भ्रष्टाचार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने करारा वार करते हुए जबलपुर RTO संतोष पाल और परिवहन विभाग की वरिष्ठ लिपिक रेखा पाल की 3.38 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों को PMLA, 2002 के तहत अटैच कर दिया है। यह कार्रवाई सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे परिवहन सिस्टम की सड़ांध को उजागर करने वाला धमाका मानी जा रही है।

ED की जांच में सामने आया कि जिनकी कुल वैध आय महज 73.26 लाख रुपये थी, उन्होंने जांच अवधि में करीब 4.80 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित और खर्च कर डाली। यानी 4.06 करोड़ रुपये की बेहिसाबी काली कमाई। सवाल सीधा है—
👉 इतनी दौलत आखिर आई कहां से और किसके संरक्षण में?


EMI से पहले नकद जमा—मनी लॉन्ड्रिंग का खुला फार्मूला

जांच के दौरान बैंक खातों में बार-बार भारी नकद जमा होने के ठोस सबूत मिले। हैरानी की बात यह रही कि यह नकदी अक्सर लोन की EMI चुकाने से ठीक पहले जमा की जाती थी। ED का साफ कहना है कि यह बैंकिंग सिस्टम के जरिए अवैध नकदी खपाने का सुनियोजित तरीका है, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग का स्पष्ट modus operandi माना गया है।

यह मामला अब केवल रिश्वतखोरी का नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक अपराध का रूप ले चुका है।


https://x.com/i/status/2005960058933567494

घर, फ्लैट, खेत और दुकानें सील

ED द्वारा ‘Proceeds of Crime’ मानते हुए जिन संपत्तियों को अटैच किया गया, उनमें—

  • आवासीय मकान
  • रेजिडेंशियल प्लॉट
  • कृषि भूमि
  • व्यावसायिक दुकानें

सभी संपत्तियां जबलपुर जिले में स्थित हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि ये संपत्तियां अवैध आय से खरीदी गईं और इसलिए इन्हें अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है।


EOW की FIR से खुला पूरा खेल

यह मामला पहले EOW भोपाल में दर्ज FIR से शुरू हुआ, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत थी। प्रारंभिक जांच में आय से अधिक संपत्ति के गंभीर आरोप सामने आने के बाद केस PMLA के दायरे में पहुंचा और ED ने सीधे मोर्चा संभाल लिया।


सबसे बड़ा सवाल—ED की कार्रवाई के बाद भी RTO पद पर कैसे कायम?

सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि करोड़ों की संपत्ति अटैच होने और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद, संबंधित RTO का परिवहन मंत्री के प्रभार वाले जिले में परिवहन अधिकारी के रूप में पदस्थ बने रहना। यह स्थिति साफ तौर पर मजबूत राजनीतिक पकड़ और सत्ता संरक्षण की ओर इशारा करती है।

सामान्य हालात में ऐसे मामलों में अधिकारी को तत्काल निलंबित या हटाया जाता है, लेकिन यहां प्रशासनिक चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
👉 क्या कानून सबके लिए बराबर है?
👉 या फिर राजनीतिक छत्रछाया में नियम-कानून बौने साबित हो रहे हैं?


आगे और बढ़ सकती है कार्रवाई

कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि PMLA के तहत आरोप सिद्ध होते हैं तो यह संपत्तियां स्थायी रूप से जब्त हो सकती हैं और अभियोजन (Prosecution) की प्रक्रिया भी तेज होगी। ED की यह कार्रवाई परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार और अवैध कमाई के पूरे नेटवर्क पर बड़ा सवालिया निशान है।


ED की यह कार्रवाई केवल एक RTO पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर करारा तमाचा है। अब सवाल यह नहीं कि भ्रष्टाचार हुआ या नहीं—
सवाल यह है कि ऐसे ‘कमाऊ अफसरों’ को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है?
और क्या अगला नंबर बाकी चेहरों का भी आएगा, या फिर यह मामला भी समय के साथ दबा दिया जाएगा?

सोमवार, 29 दिसंबर 2025

धु-धु कर जली गाय, करंट की चपेट में तड़प-तड़प कर मौत

NKJ थाना क्षेत्र में गिरे विद्युत तार से हादसा, बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

कटनी। एनकेजे थाना क्षेत्र अंतर्गत सुरखी डेम के पास एक दर्दनाक हादसे में बिजली के गिरे हुए तार की चपेट में आने से एक गाय की मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करंट लगते ही गाय तड़पने लगी और कुछ ही देर में धु-धु कर जलकर दम तोड़ दिया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर विद्युत लाइन का गिरा होना गंभीर खतरा बना हुआ था, जिसकी समय रहते सुध नहीं ली गई। हादसे के बाद यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि यदि उसी स्थान से कोई राहगीर, बच्चा या महिला गुजरती, तो परिणाम कितना भयावह हो सकता था।


मेंटिनेंस के दावों पर सवाल

क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि बिजली विभाग द्वारा मेंटिनेंस के नाम पर अक्सर घोषित व अघोषित बिजली कटौती की जाती है, लेकिन जर्जर तारों और खंभों की नियमित जांच पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले भी विद्युत लाइनों की स्थिति को लेकर चिंता जताई जा चुकी है।

विश्व हिंदू परिषद सहित नागरिकों में रोष

घटना को लेकर विश्व हिंदू परिषद के जिलामंत्री राहुल दुबे ने और स्थानीय नागरिकों ने नाराज़गी जताते हुए इसे गंभीर लापरवाही का मामला बताया है। दुबे  व स्थानीय नागरिकों ने जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध जांच, मृत पशु के मालिक को उचित मुआवजा, तथा क्षेत्र में तत्काल विद्युत सुरक्षा सुधार की मांग की है।

जांच और जवाबदेही की मांग

हादसे के बाद लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
जनता का सवाल साफ है—
क्या ऐसी घटनाओं के बाद ही सिस्टम जागेगा, या पहले सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी?

कटनी बिग ब्रेकिंग | “टीआई पैसा लेता है, मानेगा थोड़ी” वायरल वीडियो में गूंजा गंभीर आरोप एएसआई लाइन हाज़िर, पर कमांड पर चुप्पी ,कार्रवाई या सिर्फ दिखावा?

बहोरीबंद थाने में भ्रष्टाचार की खुली स्वीकारोक्ति, ASI निलंबित; थाना प्रभारी पर चुप्पी ने एक बार फिर कार्यवाही पर खड़े किए तीखे सवाल

कटनी। दिनांक 29 दिसंबर 2025 को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने कटनी पुलिस की कथित ईमानदारी, अनुशासन और सख्ती के दावों की परतें उधेड़ कर रख दी हैं। वीडियो में थाना बहोरीबंद में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक (ASI) संतलाल गोटिया न केवल भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और रिश्वत की बात स्वीकार करता नजर आता है, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल छोड़ जाता है।

वीडियो में यह साफ सुनाई देता है कि थाने में आने वाले फरियादियों को जानबूझकर घंटों बैठाया जाता था, मामलों को लटकाने के लिए विलंबकारी नीति अपनाई जाती थी और फिर राहत या कार्रवाई के बदले पैसों की मांग की जाती थी। यह आचरण न सिर्फ कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि खाकी की गरिमा पर सीधा हमला है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक कटनी ने ASI संतलाल गोटिया को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के उल्लंघन, असंनिष्ठ आचरण, गंभीर कदाचरण एवं आशोभनीय व्यवहार का दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र कटनी में पदस्थ किया है।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वीडियो में सामने आए तथ्य इतने गंभीर पाए गए कि आरोपी अधिकारी का आचरण विभागीय मर्यादाओं के सर्वथा विपरीत और संदिग्ध प्रकृति का माना गया।


लेकिन यहीं से यह मामला और ज्यादा विस्फोटक मोड़ ले लेता है।

“टीआई पैसा लेता है, मानेगा थोड़ी” — वीडियो में गूंजता यह वाक्य किस पर भारी?

वायरल वीडियो में ASI खुद यह कहते सुनाई दे रहा है कि

“टीआई पैसा लेता है, मानेगा थोड़ी…”

यह वाक्य आज भी उसी वीडियो में जोर-जोर से गूंज रहा है, जिसे देखकर पुलिस अधीक्षक ने ASI को थाने से हटाकर रक्षित केंद्र भेज दिया। लेकिन सवाल यह है कि—

👉 जिस प्रकार थाना प्रभारी (टीआई) के लिए यह गंभीर आरोप वीडियो में खुलेआम लगाया गया,

👉 उससे न तो कोई जवाब-तलब किया गया,

👉 न ही किसी तरह की प्रारंभिक जांच की घोषणा हुई।

साहब, जरा गौर से उस वीडियो को सुनिए—

जनता के सामने आज भी वही शब्द गूंज रहे हैं और पूरी कार्रवाई पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।

❗ कमांड फेल या संरक्षण प्राप्त?

जिस थाने में एक अधीनस्थ अधिकारी बेख़ौफ होकर रिश्वत के रेट तय कर रहा हो, और वीडियो में थाना प्रभारी तक की भूमिका पर सवाल उठ रहे हों—वहां की कमांड या तो पूरी तरह कमजोर है, या फिर इस पूरे खेल को ऊपर से संरक्षण प्राप्त है। यह संरक्षण प्रशासनिक है या किसी सफेदपोश आशीर्वाद का परिणाम—यह जांच का विषय है, लेकिन चुप्पी खुद बहुत कुछ कह रही है।

जनता के बीच यह सवाल अब और तीखा हो चुका है—

क्या सिर्फ एक ASI को निलंबित कर देने से सिस्टम पाक-साफ हो जाएगा?

या फिर यह कार्रवाई असली जिम्मेदारों को बचाने के लिए की गई खानापूर्ति है?

कटनी पुलिस के लिए यह महज़ एक विभागीय आदेश नहीं, बल्कि विश्वसनीयता की खुली कसौटी है।

यदि वायरल वीडियो में उठाए गए थाना प्रभारी और कमांड लेवल के सवालों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच नहीं हुई, तो यह साफ माना जाएगा कि भ्रष्टाचार पर प्रहार नहीं, सिर्फ उसका प्रबंधन किया गया है।

थाना या दलाली केंद्र? मुचलके पर रिहाई की कीमत तय करते एएसआई का वीडियो वायरल

थाना या दलाली केंद्र? मुचलके पर रिहाई की कीमत तय करते एएसआई का वीडियो वायरल, 

थाने के भीतर रिश्वत का रेट कार्ड, वीडियो ने उधेड़ी खाकी की परतें

कटनी। जिले में कानून का राज और सख्ती के दावों के बीच बहोरीबंद थाना से सामने आया वायरल वीडियो पुलिस तंत्र की साख को ज़मीन पर पटकने के लिए काफी है। वीडियो में थाने में पदस्थ एएसआई संतराम गोटिया आरोपी को मुचलके पर छोड़ने के बदले पैसों की खुलेआम सौदेबाज़ी करते और 5000 व 3000 रुपये लेने की बात खुद स्वीकारते नजर आते हैं। इतना ही नहीं, वह यह कहते भी सुने जा रहे हैं—“पैसों की बात फोन पर थोड़ी ना की जाती है”—यह कथन किसी एक कर्मचारी की नहीं, बल्कि थाने के भीतर पनप चुकी भ्रष्ट मानसिकता का आईना है।

यह मामला ऐसे वक्त में सामने आया है, जब जिले में ईमानदार पुलिस कप्तान के नेतृत्व में अपराध नियंत्रण के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गंभीर अपराधों में भी रियायत और पैसे के दम पर राहत का खेल बेरोकटोक चल रहा है। सवाल उठता है—
क्या कटनी में अब न्याय कानून से नहीं, नकद से मिलता है?
क्या थाने न्यायालय नहीं, सौदेबाज़ी के काउंटर बन चुके हैं?

वीडियो ने यह भी उजागर किया है कि निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल है। अगर एक एएसआई कैमरे के सामने इस तरह रिश्वत की बात स्वीकार कर रहा है, तो बिना कैमरे के कितने सौदे रोज़ तय होते होंगे, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं। यह केवल एक अधिकारी का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सड़ांध है, जो अपराधियों को संरक्षण और आम नागरिक को अपमान दे रही है।

अब सवाल कार्रवाई का है।
क्या एएसआई पर तत्काल निलंबन, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर, और स्वतंत्र जांच होगी?
या फिर यह भी बाकी मामलों की तरह जांच के नाम पर दबा दिया जाएगा?

जनता का आक्रोश साफ है—
कानून या सौदा—एक को चुनना होगा।
अगर इस वायरल वीडियो के बाद भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मान लिया जाएगा कि भ्रष्टाचार को मौन संरक्षण प्राप्त है और खाकी ने खुद अपनी विश्वसनीयता मुचलके पर छोड़ दी है

घर में घुसा बाघ, आदिवासी युवक पर जानलेवा हमला

पनपथा बफर जोन में दहशत—वन विभाग की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

उमरिया। पनपथा टाइगर रिज़र्व के बफर जोन अंतर्गत बेल्दी बीट से सटे ग्राम बेल्दी में मंगलवार को बाघ का आतंक खुलकर सामने आ गया। जंगल से भटककर बस्ती में घुसे बाघ ने घर के भीतर घुसकर एक आदिवासी व्यक्ति पर जानलेवा हमला कर दिया। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों में आक्रोश उफान पर है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गोपाल पिता हेतराम कोल (उम्र 52 वर्ष), निवासी पडवार, अपनी बहन से मिलने बेल्दी गांव आया था। इसी दौरान अचानक बाघ बस्ती में घुस आया और गोपाल पर झपट पड़ा। हमले में बाघ ने उसका पैर बुरी तरह चबा लिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। ग्रामीणों की मदद से घायल को पहले बरही अस्पताल पहुंचाया गया, जहां हालत नाजुक देखते हुए डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।


घटना के बाद गांव में बाघ की निरंतर मूवमेंट से भय का माहौल बना हुआ है। महिलाएं और बच्चे घरों में दुबकने को मजबूर हैं, जबकि खेतों और रास्तों पर निकलना भी जोखिम भरा हो गया है। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सावधानी बरतने की अपील की, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अपील से नहीं, ठोस कार्रवाई से जान बचेगी

ग्रामीणों ने सीधे तौर पर वन विभाग की घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि न तो नियमित सर्चिंग होती है, न ही बाघों की प्रभावी निगरानी। यही वजह है कि बाघ बार-बार जंगल छोड़कर बस्तियों तक पहुंच रहे हैं और आदिवासी व ग्रामीण उनकी कीमत चुका रहे हैं। सवाल यह भी है कि बफर जोन में बसे गांवों की सुरक्षा के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली और रात्री गश्त आखिर कहां है?

फिलहाल बाघ की दस्तक के बाद वन विभाग की टीम सक्रिय होने का दावा कर रही है और लोगों को सतर्क किया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जब तक बाघ को सुरक्षित तरीके से ट्रेस, रेस्क्यू या नियंत्रित नहीं किया जाता, तब तक बेल्दी और आसपास के गांवों पर खतरा बना रहेगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषियों पर कार्रवाई, स्थायी निगरानी व्यवस्था, और पीड़ित को तत्काल मुआवजा दिया जाए—वरना अगला हमला किसी और की जान ले सकता है।

रविवार, 28 दिसंबर 2025

खोखला “ऑपरेशन शिकंजा” बेनकाब अवैध शराब पर दिखावटी कार्रवाई, सड़कों पर उतरा जनआक्रोश—आंदोलनों ने खोली पोल

कटनी। अपराध और अवैध शराब पर नकेल कसने के दावों के बीच एसपी का “ऑपरेशन शिकंजा” अब दिखावटी मुहिम साबित होता नजर आ रहा है। जिले के गांव–गांव में भड़कते जनआंदोलन यह साफ कर रहे हैं कि कार्रवाई ज़मीन पर नहीं, सिर्फ़ काग़ज़ों, फोटो-ऑप्स और प्रेस नोट तक सीमित है। अगर शिकंजा सच में कस रहा होता, तो महिलाएं अपने घर-परिवार बचाने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर क्यों होतीं?

बरही थाना क्षेत्र के कुंदरेही सहित कई इलाकों में महिलाओं के नेतृत्व में हुए उग्र विरोध ने प्रशासन की निष्क्रियता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। नारों की गूंज—“गांव में शराब नहीं बिकेगी”, “नशा नहीं, विकास चाहिए”—इस बात का सबूत है कि दावे और हकीकत के बीच खाई गहरी होती जा रही है। महिलाओं का आरोप है कि अवैध शराब ने घर-घर की शांति उजाड़ दी, घरेलू हिंसा बढ़ी, कमाई शराब में उड़ रही है और बच्चों का भविष्य अंधेरे में धकेला जा रहा है।

ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि असली शराब माफिया खुलेआम कारोबार कर रहे हैं, जबकि कार्रवाई खानापूर्ति और चुनिंदा मामलों तक सिमट गई है। बार-बार शिकायतों के बावजूद ठोस कदम न उठना, माफिया के हौसले और बुलंद कर रहा है। यही वजह है कि जनता पूछ रही है—क्या “ऑपरेशन शिकंजा” अपराध खत्म करने की मुहिम है या जनता को गुमराह करने की तकनीक?

प्रदर्शनकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि अवैध शराब पर तत्काल रोक, दोषियों की गिरफ्तारी और नशामुक्ति की ठोस योजना लागू नहीं हुई, तो थाना-घेराव, सड़क जाम और अनिश्चितकालीन आंदोलन होगा। यह संघर्ष किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि अपने गांव और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने की लड़ाई बताया जा रहा है।

लगातार भड़कते आंदोलन की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। जनता का अल्टीमेटम साफ है—
दिखावटी शिकंजा नहीं, माफिया की कमर तोड़ने वाली ईमानदार कार्रवाई चाहिए।


सत्ता के शोर में शिल्पकार का अपमान! भाजपा के शिल्पकार कुशाभाऊ ठाकरे उपेक्षा के शिकार, पुण्यतिथि पर भी सम्मान नसीब नहीं गंदगी के बीच खड़ा भाजपा का इतिहास पंच से प्रधानमंत्री तक सत्ता, पर संस्कार गायब!

कटनी। 
भारतीय जनता पार्टी को संगठन की मज़बूत रीढ़ देने वाले, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और “भाजपा के शिल्पकार” कहे जाने वाले की प्रतिमा कटनी के जबलपुर बायपास पर भले ही भारी तामझाम के साथ स्थापित कर दी गई हो, लेकिन आज वही प्रतिमा उपेक्षा, गंदगी और राजनीतिक कृतघ्नता का जीता-जागता स्मारक बन चुकी है।

आज कुशाभाऊ ठाकरे की पुण्यतिथि है। वही कुशाभाऊ ठाकरे, जिनके संगठनात्मक परिश्रम, अनुशासन और त्याग के दम पर आज भाजपा पंच से लेकर प्रधानमंत्री तक सत्ता के शिखर पर बैठी है। लेकिन अफ़सोस, आज उसी पार्टी ने अपने ही शिल्पकार को कूड़े-करकट की तरह भुला दिया। प्रतिमा लगाकर औपचारिकता निभा ली गई, पर सम्मान देने की ज़रूरत ही नहीं समझी गई

सबसे ज़्यादा चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पुण्यतिथि के दिन प्रदेश के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा जिले में मौजूद थे, इसके बावजूद

  • माल्यार्पण किया गया
  • न प्रतिमा स्थल की साफ-सफाई
  • न नाम मात्र का गार्डन रख-रखाव
  • यहाँ तक कि मूर्ति पर जमी धूल तक नहीं हटाई गई

प्रतिमा स्थल की बदहाली खुद गवाही दे रही है कि सत्ता में बैठी भाजपा आज अपने ही इतिहास और अपने ही स्तंभों को कितनी बेरहमी से नज़रअंदाज़ कर रही है। चारों ओर फैली गंदगी, उजड़ा परिसर और सन्नाटा — यह सब भाजपा की उस संवेदनहीन राजनीति को उजागर करता है, जिसे मंचों से संस्कार और राष्ट्रवाद के भाषण देकर ढका जाता है।

पंच से प्रधानमंत्री तक भाजपा की सरकार है, संसाधनों की कोई कमी नहीं, फिर भी जिन महापुरुषों ने पार्टी को इस मुकाम तक पहुँचाया, उनके साथ यह व्यवहार — यह लापरवाही नहीं, यह खुली राजनीतिक कृतघ्नता है

कटनी में आज जो दृश्य सामने आया, उसने यह साफ कर दिया कि

सत्ता की चमक में भाजपा अपने ही शिल्पकारों को किनारे लगाने से नहीं हिचकती।

कुशाभाऊ ठाकरे की पुण्यतिथि पर यह उपेक्षा न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए अपमानजनक है, बल्कि भाजपा की कथनी और करनी के बीच की खाई को भी उजागर करती है।

अब सवाल सिर्फ कटनी का नहीं है, सवाल पूरी पार्टी से है—
क्या भाजपा अपने शिल्पकारों का सम्मान सिर्फ पोस्टरों, भाषणों और श्रद्धांजलियों तक ही सीमित रखेगी?