कटनी। इंद्रानगर शादी समारोह में बारातियों पर हुए कथित लाठीचार्ज, जातिसूचक अपमान और बर्बर मारपीट का मामला अब विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गया है। चार दिन तक उठते सवालों, वायरल वीडियो और बढ़ते जनदबाव के बाद पुलिस ने घटना में शामिल 5 सिविल ड्रेस हमलावरों को नामजद कर FIR दर्ज कर ली है। लेकिन मामला यहीं नहीं थमा—अब दलित समाज ने मारपीट में शामिल पुलिसकर्मियों पर भी आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग करते हुए सोमवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय घेराव का ऐलान कर दिया है।
वीडियो वायरल, खुली ‘सिस्टम’ की परतें
घटना के वीडियो सामने आने के बाद साफ दिखाई दिया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान कुछ बाहरी लोग भी बारातियों पर हमला कर रहे थे। लाठी-डंडों से मारपीट करते इन लोगों की मौजूदगी ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। आखिर ये लोग कौन थे? किसके कहने पर आए थे? और पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई क्यों कर रहे थे?
लगातार उठते सवालों के बीच अब जिन 5 लोगों को नामजद किया गया है, उनमें—
- राहुल निषाद
- साहिल खान
- आकाश कोल
- चाहत सोनी
- मनु सोनी
शामिल हैं।
गंभीर धाराओं में FIR
मामले में भारतीय न्याय संहिता और SC/ST एक्ट की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं—
- BNS 296(a) – गाली-गलौज / अशांति
- BNS 115(2) – मारपीट / चोट
- BNS 351(3) – धमकी / आपराधिक भय
- SC/ST Act 3(1)(द), 3(1)(ध), 3(2)(va) – जातिसूचक अपमान और अत्याचार
दो उपनिरीक्षक लाइन अटैच, पर FIR अब तक नहीं
घटना के दूसरे दिन ही दो उपनिरीक्षकों को लाइन अटैच कर दिया गया था, लेकिन दलित समाज का कहना है कि यह सिर्फ दिखावटी कार्रवाई है। जिन पुलिसकर्मियों पर महिलाओं, बच्चों और बारातियों को पीटने के आरोप हैं, उन पर अब तक FIR दर्ज नहीं होना न्याय व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
सोमवार को निर्णायक घेराव
दलित समाज और सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल केस दर्ज नहीं हुआ तो सोमवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव किया जाएगा। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की तैयारी है।
कटनी में बढ़ता जनाक्रोश
इंद्रानगर कांड अब सिर्फ एक मारपीट का मामला नहीं रहा, बल्कि यह खाकी की जवाबदेही बनाम जनता के न्याय की लड़ाई बन चुका है। शहर में चर्चा है कि अगर आरोपी वीडियो में साफ नजर आ रहे थे तो कार्रवाई में चार दिन की देरी क्यों हुई?
अब प्रशासन के सामने सीधी चुनौती
एक ओर 5 आरोपी नामजद हैं, दूसरी ओर पुलिसकर्मी अब भी कानूनी शिकंजे से बाहर। ऐसे में सोमवार का घेराव प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा माना जा रहा है। सवाल साफ है—क्या खाकी पर भी कानून चलेगा, या फिर मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा?




























